साइटिका
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साइटिका –

साइटिका शरीर की सबसे बड़ी और मोटी नर्व(तंत्रिका)है। साइटिका में इस तंत्रिका के मार्ग में कही भी दर्द होता है सामन्यतः ये दर्द पीठ के निचले भाग से शुरू होकर धीरे धीरे पैरों में जाता है। ये दर्द एक पैर में होता है कुछ केसेस में दोनों पैरो में दर्द होता है। सामान्यतः साइटिका कुछ उपचार के बाद २/३ हफ्ते में ठीक हो जाता है। आयुर्वेद में साइटिका के लिए अच्छी ट्रीटमेंट है।

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साइटिका

साइटिका के लक्षण

साइटिका में साइटिका नर्व के पाथ में कही भी दर्द हो सकता है कमर में ,नितम्ब में या फिर पैरो में ये दर्द कभी सुई चुभने की तरह ,झनझनाहट वाला या एकदम शार्प चुभने वाला होता है।

ये दर्द कॉन्स्टन्ट होता है या फिर रुक रुक कर हो सकता है।

साइटिका में चलने का तरीका ही बदल जाता हैं चाल गिधड की तरह हो जाती है तो आयुर्वेद में इसे गृध्रसी ( वातविकार ) नाम है।

पैरो में कमजोरी या सूनापन महसूस होता है।

बैठने उठने में दिक्कत हो जाती है यानि मूवमेंट करने में तकलीफ होती है।

साइटिका होने के कारण और रिस्क फैक्टर

स्पाइन रिलेटेड प्रॉब्लम

पीठ के निचले हिस्से में स्पाइनल कॅनॉल छोटी हो जाना,आकुंचित होना जिसे स्पाइनल स्टेनोसिस कहा जाता है इससे साइटिका हो जाता है।

रीढ़ की हड्डिया या कशेरुकाएँ एक दूसरे पर आ जाने से साइटिका तंत्रिका पर प्रेशर आकर ये प्रॉब्लम शुरू हो जाता है।

स्लिप डिस्क याने कशेरुकाऔ में जो डिस्क होती है वो फूल जाती है अपनी जगहसे बाहर निकल वो तंत्रिकाओ पर प्रेशर डालती है तब भी साइटिका का पैन शुरू हो जाता है इसमें पैरो में स्तब्धता भी आती है।

मसल्स में जकड़न होकर

ये हैवी सामान उठाने से

बैठने उठने के गलत तरीको से

ज्यादा पैदल चलना भी साइटिका का कारन बन सकता है।

हाय हील्स पहनना भी एक कारण है जिससे मसस्ल्स जकड़कर तंत्रिका पर प्रेशर आ जाता हैं

एक्सीडेन्टल इंज्युरी से

गिरना ,ट्रैफिक एक्सीडेंट आदि में स्पाइन की इन्वॉल्वमेंट हो गयी हो तो साइटिका होने के चान्सेस रहते हैं।

भोजन और लाइफस्टाइल

भोजन में बांसा और वात को बढ़ाने वाले अन्न का हमेशा से सेवन करना ,पर्याप्त नींद न लेना चिंता और डिप्रेशन में रहना इससे भी साइटिका का दर्द बना रहता है और रिस्क फैक्टर बनता है।

स्मोकिंग करना ये सभी साइटिका के रिस्क फैक्टर हैं।

ओवरवेट और डायबेटीस

वेट ज्यादा होने से स्पाइन पर बुरा असर पड़ने लगता है और साइटिका होने के चान्सेस बढ़ते है ,डाईबेटिस में शुगर लेवल अनुसार नर्व डैमेज होता है तो वो भी साइटिका के लिए रिस्क फैक्टर है।

साइटिका ट्रीटमेंट

रेगुलर एक्सरसाइज

इसमें स्ट्रेचिंग के कुछ तरीके और योगासन योग्य मार्गदर्शक की उपलब्धि में करना लाभदायी है।

शारीरिक स्थिति और रोग के अनुसार योगासन सलेक्ट करना होता है , रोगअवस्थानुसार योगासन का अभ्यास करे

भुजंगासन

बालासन

एकपादप्रसरणासन

पश्चिमोत्तानासन

धनुरासन

शलभासन

हलासन

मत्स्यासन

तोलांगुलासन

ये सभी पीठ ,नितम्ब ,और पैरो की मजबूती बढ़ाने वाले आसन है और साइटिका की प्रॉब्लम में रिलीफ देते हैं। और साइटिका होने से भी ये प्रोटेक्ट करते है।

मेन्टेन पोस्चर

बैठने उठने का सही तरीका रखे।

ज्यादा बैठने का काम हो तो पीठ को सपोर्ट दे। जिससे पीठ का कर्व पोजीशन में रहे।

ज्यादा हील्स सैंडल अवॉयड करें।

जॉब्स जैसे टेलर ,ड्राइवर ,टीचर ,वेट लिफ्टर ,आईटी इंजीनिअर ,होम सर्वेन्ट्स आदि इनमे पोस्चर ठीक रखने की बात ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि बादमे जॉब्स पर ही ज्यादा इफ़ेक्ट पड़ता है।

साइटिका में आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेद ने इस व्याधि को 80 वातविकार में से एक माना है और उपचारविधि बताई है।

उपचारपद्धतिमे व्यक्ति और रोगानुसार उपचार पद्धति तय की जाती है।

  • स्नेहन – इसमें अफेक्टेड पार्ट पर औषधियुक्त ऑइल लगाया जाता हैं।
  • स्वेदन -हर्ब्स का उपयोग कर स्टीम दिया जाता है।
  • शोधन -इसमें विरेचन और बस्ती का उपयोग किया जाता है।
  • अग्निकर्म और विद्धकर्म -ये वातविकार में काफी इफेक्टिव ट्रीटमेंट हैं। अग्निकर्म में ज्यादातर सुवर्णशलाका का इस्तेमाल किया जाता है इसमें साइटिका नर्व के पाथ अनुसार उचित पॉइंट पर और जहा ज्यादा दर्द है उस पॉइंट पर अग्निकर्म किया जाता हैं। विद्ध कर्म से दर्द इंस्टेंट ली कम होने का अनुभव बहोत सारे पेशंट लेते हैं ।

साइटिका में आयुर्वेदिक हर्ब्स

बला ,अश्वगन्धा ,निर्गुन्डी ,रास्ना ,देवदार ,पुनर्नवा ,शिग्रु आदि कई वनस्पतियोंका उपयोग किया जाता हैं।

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By admin

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