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वर्ल्ड स्लीप डे 2022

ऐसा लगा की जिंदगी से अब मुलाकात हो गयी ,

बचपन की नींद अब ख्वाब हो गयीं।

वर्ल्ड स्लीप डे

हर साल की तरह इस साल भी मार्च में वर्ल्ड स्लीप डे मनाया जा रहा है इस साल ये 18 मार्च को मनाया गया। इसकी शुरुवात वर्ल्ड स्लीप सोसाइटी ने 2008 से की थीं। करंट सिचुएशन ऐसे बनते जा रहे है की अच्छी नींद आना एक सपने की तरह हो गया है। शांतिपूर्ण नींद आने वाला व्यक्ति खुशकिस्मत ही कहा जाना चाहिए। भारतीय व्यक्तियों में नींद की प्रॉब्लम बढ़ती जा रही है और इस प्रॉब्लम को लेकर देश अब दूसरे स्थान पर है और जापान के लोग नींद की बीमारियों से ग्रसित है वो है पहले स्थान पर ,नींद ही तो है जो हमारे शरीर और मन को चार्ज रखती है।

वर्ल्ड स्लीप डे का उद्देश्य और इस साल का स्लोगन

लोगो में नींद से होने वाले फायदे ,नींद की बीमारियाँ ,नींद का शरीर और मन पर असर कितना होता है इन सभी की जागरूकता बढ़ने के उद्देश्य से इस दिन की शुरुवात की गयी।

इस साल का स्लोगन या थीम –अच्छी नींद। स्वस्थ मन। खुशहाल दुनिया।

इस स्लोगन के साथ मनाया जा रहा है।

नींद का शरीर और मन पर प्रभाव

नींद कम हो या ज्यादा हो इसका प्रभाव दिखने लगता है ,

  • दिनभर के कामकाजपर
  • भावनिक स्थिति पर
  • शरीर के वजन पर
  • शरीर की विभिन्न अंतर्गत संस्थाओ पर

नींद एक नेचुरल बात है अगर ये सही तरीके से न हो तो शरीर दर्द ,सिरदर्द ,थकान ,आँखों में दर्द ,बैचेनी ,एसिडिटी आदि कई लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं।

अच्छी नींद के लिए टिप्स

रेगुलर एक्सरसाइज़ करे ,एक्सपर्ट की मदद से योगासन, प्राणायाम ध्यान (मेडिटेशन )सीखे। पढ़े -योग के फायदे

डाइट पर ध्यान दे ,सोने से पूर्व कॉफी ,चाय,अल्कोहल,स्मोकिंग,हेवी डिनर न करे, स्प्राउट तले हुए पदार्थ भी अवॉयड करे।

गुनगुना दूध एक चम्मच देसी घी डालकर पिए।

दिन में सोने की आदत न डालें।

रात को हो सके तो फुट मसाज करे जिससे रिलैक्स हो कर नींद आ जाए।

सोने का और सुबह उठने का टाइमिंग फिक्स रखे।

मोबाइल ,टीवी को अवॉयड करे।

वार्म शावर ले सकते है जिन्हे दिनभर ज्यादा काम होता है वो लोग ,देखा गया है इससे भी नींद में इम्प्रूवमेंट होती है।

आइमास्क का उपयोग भी कर सकते है जिन्हे थोड़ी भी रौशनी आदि सहन न होती हो वो लोग या जिन्हे नींद से पूर्व ज्यादा बैचेनी महसूस होती है वो लोग।

आयुर्वेद में नींद के बारे में क्या कहा गया है ?

नींद को शरीर का उपस्तम्भ मानते हुए इसका महत्व बताया है। त्रिदोष में से वात दोष बढ़ने पर स्लीप रिलेटेड प्रॉब्लम दिखने लगते है जैसे नींद नहीं आना ,नींद कम आना ,बार बार नींद का टूट जाना आदि ,हम देखते है की वृद्धावस्था में जैसे वात की वृद्धि होती है तो नींद कम होने लगती है। आयुर्वेद में इसके लिए कुछ औषधिया और थेरेपीज का उपयोग किया जाता हैं।

निद्रा और आयुर्वेद शिरोधारा थेरेपी

शिरोधारा

SHIRODHARA

इसके कई प्रकार होते है नींद के प्रॉब्लम में फ़ोरहेड पर कुछ समय के लिए ऑइल की धारा छोड़ते है इसमें मेडिकेटेड आयल यूज़ किया जाता है जैसे ब्राम्ही ,आँवला ,जटामांसी ,क्षीरबला आदि वनस्पतियोसे बने ऑइल इसके लिए उपयोग में लाए जाते है। शिरोधारा से शरीर और मन दोनों रिलैक्स होते है ,देखा गया है की एंग्जायटी ,अनिद्रा ,स्ट्रेस आदि में ये ट्रीटमेंट काफी इफेक्टिव है।

शिरोधारा से सेंस ऑर्गन को ताकत मिलती है जिससे नेचुरल स्लीप आने लगती है।

हर्ब्स का उपयोग

तगर

ब्राम्ही

अश्वगंधा

शंखपुष्पी

आँवला

जटामांसी

वचा

अर्जुन

आदि कई हर्ब्स आयुर्वेदिक फ़ॉर्मूलेशन्स में नींद की प्रॉब्लम में उपयोग में लाए जाते है।

By admin

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