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फटी एड़िया /(cracked heels )

fati aediya
फटी एड़िया एक माइनर स्किन प्रॉब्लम है लाइफस्टाइल की वजह से या प्रॉपर खानपान का ध्यान न रखने से जिससे पोषकतत्वों का अभाव हो जाता है  ,पैरो की प्रॉपर केयर न लेने से ये कॉमन फुट प्रॉब्लम हो जाता हैं। 

cracked heels के कारण

शरीर में वातदोष बढ़ने से  साधारणतः लोकलाइज एरिया में जैसे पैरो की तलवों की त्वचा खुरदरी हो जाती है ,त्वचा की ग्रोथ हो जाती है ,कलर चेंज हो जाता है और तलवो में दर्द,खुजली,या कभी ब्लीडिंग हो जाती हैं ,आयुर्वेद में इसे पाददारी कहते हैं। 
शरीर की कुछ बीमारिया भी ,कुछ लाइफस्टाइल से ,शरीर में पोषकतत्वों की कमी से फटी एड़ियों की प्रॉब्लम और बढ़ने लगती हैं। 

इन बीमारियों में दिखती है फटी एड़ियों की प्रॉब्लम

डायबेटीस,हाइपोथायरायडिजम , सोरियासिस ,फंगल इन्फेक्शन और विटामिन की कमी में फटी एड़ियों की प्रॉब्लम देखी जाती है। 

लाइफस्टाइल से संबधित कारण  में फटी एड़ियों  की प्रॉब्लम

  1. खेती में काम करना ,या गार्डनिंग जिसमे मिटटी से ज्यादा देर तक संबध आता हैं। 
  2. नाईट शिफ्ट का काम 
  3. धूलभरी जगहों पर खुले पैरो से रहना ,चलना। 
  4. लम्बे समय खड़े रहना
  5. शूज़ या सैंडल  की फिटिंग प्रॉपर नहीं होना 
  6. ज्यादा ट्रैवेलिंग करना 
  7. तम्बाखू ,सुपारी,स्मोकिंग  आदि का व्यसन 
  8. बढ़ती आयु से 
  9. मोटापन 
  10. प्रेगनेंसी 
  11. पैरो की सफाई का उचित ध्यान नहीं रखना 
  12. उचित मात्रा में नींद न लेना 
  13. मानसिक तनाव भी शरीर में वात बढ़ने में कारण होता है। 
  14. वातावरण में ठंडी बढ़ने  से 
ये सभी फटी एडीओ को बढ़ने के कारन होते है। 

भोजन की ख़राब आदतें

खाने में घी,तैल बिलकुल कम होना,मसालेदार भोजन,अचार आदि का नियमित ज्यादा मात्रा में सेवन ,फल और सब्जियों की कमी से पोषकतत्वों की कमी ये सभी फटी एड़ियों को बढ़ने में सहायक हो जाते हैं। 

फटी एड़ियों के लक्षण

  • पैरो के तलवे ड्राई हो जाना 
  • खुजली आना 
  • तलवो में दर्द रहना 
  • ड्राई नेस ज्यादा होने पर खून निकलना 
  • अलसर की निर्मिति 

फटी एड़ियों में रखे इन चीज़ो का ध्यान

  • फटी एड़ियों में बाहर से लगाने के लिए आयल,क्रीम का उपयोग ,खाने की आदतों का परिवर्तन ,ओरल कुछ मेडिसिन जरुरत हो तो ,लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव अगर ये कारनो  में शामिल हो तो करना चाहिए जिससे इनसे छुटकारा मिल जाता है। 
  • पैरो की सफाई पर ध्यान दे पैरो को गुनगुने पानी में २० मिनट रखकर अच्छे से पोंछ लें बाद में आयल या मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें। जिससे वात कम होने लगता है पैर सॉफ्ट हो जाते हैं। 
  • पैरो को तैल लगाने को पादाभ्यंग कहते हैं पैरो में जैसे लक्षण है उस हिसाब से मेडिकेटेड ऑइल  का उपयोग किया जाता है जैसे चन्दनबलालाक्षा तैल ,पिण्ड तैल आदि। 
  • सॉक्स का उपयोग करे 
  • अच्छी क्वालिटी के फुटवेअर पहनें ,ज्यादा हील का उपयोग न करें। 
  • शरीर को अच्छी तरहसे हाइड्रेट रखे। 

आयुर्वेद में फटी एड़ियों के लिए एक्सटर्नल एप्लीकेशन के लिए

  • सर्जरस मलहर 
  • जात्यादि तैल 
  • जात्यादि घृत 
  • पिण्ड तैल 
  • शतधौत घृत 
  • जीवनत्यादी यमक 
  • महातिक्तक घृत 
आदि का उपयोग आयुर्वेद कंसलटेंट के सुझाव अनुसार कर सकते हैं। 

फटी एड़ियों के लिए आयुर्वेदिक क्रीम्स

फुट केयर क्रीम         (हिमालया )
मोहा फुट  क्रीम            (चरक )
ट्रायकोडर्मा              (Atrimed ) आदि 

हर्ब्स जिनका उपयोग फटी एड़ियों के लिए किया जाता है

एलोवेरा 
टर्मेरिक 
मंजिष्ठा 
यष्टिमधु 
पुदीना 
चन्दन 
नीम 
सर्जरस 
और प्राणिज द्रव्यों में हनी बी वैक्स का उपयोग किया जाता है। 

 फटी एड़ियों के लिए घरेलु उपाय

  • कोकोनट आयल
इसे लगाने से त्वचा सॉफ्ट मुलायम बनती है। गुणधर्म अनुसार इस आयल में एंटीबैक्टीरियल और एन्टीइन्फ्लैमटोरी प्रॉपर्टीज भी है। 
  • हनी/शहद
शहद में एंटी माइक्रोबियल और एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज है। 
 पैरो को क्लीन कर रात में शहद लगाए कुछ दिन में ही फर्क दिखने लगेगा। 
  • शुद्ध घी
शुद्ध घी में थोड़ी हल्दी डालकर इससे मसाज करे ये भी काफी इफेक्टिव उपाय घरमे कर सकते हैं। 

फटी एड़ियों में किस बारे में सावधानी बरते ?

  • अगर कोई मेडिकल कंडीशन से रिलेटेड फटी एड़िया हो जो जल्दी ठीक नहीं होती हो तो वैद्यकीय सलाह ले. 
  • डायबेटीस में डेली पैरो का निरिक्षण करे ,और फटी एड़ियों के लिए एक्सपर्ट की सलाह ले। 

By admin

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