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एंग्जायटी (anxiety )क्या है 

anxiety disorder

                          चिंता करना आम बात है,  दुनिया में ५० % लोग इससे ग्रसित है पर बात तब बिगड़ जाती है जब  हमारी दिनचर्या  पर इसका असर होता है।

जैसे जॉब इंटरव्यू की चिंता होना  या  नर्वस होना किसी एग्जाम को देने से पहले थोड़ी  चिंता होना ,स्पीच देने से पहला घबरा जाना ये सब स्वाभाविक है। 

पर इसके ऊपर आपके विचार चलते हो  विचारो पर कुछ कंट्रोल ही नहीं रहा हो ,हमेशा फ्यूचर का डर  बना रहे  ,बीते समय को भूल पाना मुश्किल हो  या बार बार उन्ही विचारो में आप चले  जाते  हो  तो आपको एंग्जायटी डिसॉडर हो सकती है जिसके लिए मेडिकल एक्सपर्ट की मदद लेनी  चाहिए। 

 चिंताओं के बहोत सारे  प्रकार है उसमे एक आता  है सिचुएशन को फेस करने का डर जिसे कहते है सिचुएशन फोबिआ जो इस pandemic  में बढ़ा हुआ नजर आ रहा है इस सिचुएशन में हम किस तरह से निजात पा सकते हैं या किस तरह से हम anxiety  को हमसे दूर रख सकते हैं। 

 

     दिनचर्या में बदलाव 

       दिनचर्या में कई बाते आती है जैसे सुबह जल्दी उठने से लेकर रात को सोने तक की बातो  को  अच्छी  आदतों में बदलना।  सुबह जल्दी उठने से विचारो में  बदलाव आते है नेगेटिव   थॉट्स के  बजाय पॉजिटिव विचार आना  शुरु होते है, हमारी बायोलॉजिकल क्लॉक  ठीक होने में मदद  मिलती  जिससे शारीरिक और मानसिक   स्तर पर बदलाव आता है।   

      व्यायाम  (exercise )

               आप इसमें सूक्ष्म व्यायाम ,आसन ,स्विमिंग, जॉगिंग,    रनिंग , वाकिंग ,डांसिंग करे  जिससे बॉडी की कुछ न कुछ एक्टिविटी  हो  वो कर सकते है। इससे एंडोर्फिन हार्मोन बढ़ने लगता है जो मूड बूस्टर है।  चिंता को कम करता है , इससे स्ट्रेस हार्मोन कम  होते है ,कॉन्फिडेंस बढ़ता   है ,नींद भी अच्छी  हो जाती है पाचन शक्ति बढ़ती है ओवरआल एंग्जायटी   कम करने का ये सरल उपाय है। कुछ भी न हो तो सिर्फ १० मिनट चले इससे भी आपको कुछ तो बदलाव जरूर  महसूस होगा। 

      प्राणायाम  

            ये एक विशिष्ट अभ्यास है जिसे किसी जानकर व्यक्ति से सीखकर किया जाना  चाहिए  पतंजलि के अष्टांग योग का ये एक महत्वपूर्ण अंग है। 
इसके कई लाभ देखे गए है जैसे विचारो में स्थिरता आना , अवसाद  कम होना , प्रसन्नता बढ़ना  आदि
अगर प्राणायाम न हो सके तो सिर्फ हवा को अंदर ले जिसे हम साँस लेना छोड़ना इसे ५/६ बार करे ताकि हमारे चिंता के विचार उस समय के लिए रुक जाये। 
  deep breathing  और  slow breething  की तकनीक से भी एंग्जायटी  में आराम मिलता है।  नेगेटिव फीलिंग्स कम होती है। 

     कुछ न कुछ करे 

       जब हमे चिंता के विचार आने लगते है तो तुरंत कुछ दूसरा काम शुरू करे हमारे विचारो की शृंखला को तोड़े जैसे पानी पिए ,खड़े रहे या चलना शुरू कर दे ,कुछ अलग एक्टिविटीज में भाग ले। 

 

      मेडिटेशन 

जॉन हॉपकिन  इंस्टिटूइट के अनुसार अगर रोज ३० मिनट तक मेडिटेशन करने से चिंता  और अवसाद की स्थिति में काफी सुधार दीखता है  तो इसे अपनी डेली रूटीन में जरूर शामिल करे कुछ आध्यात्मिक संस्थाओंसे जुड़े जिससे  मैडिटेशन की अच्छी  जानकारी और लाभ मिले। इससे मन में पॉजिटिव थॉट्स निर्माण करने की प्रैक्टिस भी हो जाती है।  
अगर ये भी संभव न हो तो अपनी जो भी प्रार्थनाये मंत्र आदि का भी प्रयोग करे ताकि मन  को रिलैक्सेशन मिले। 
TY ARNOLD  जो की एक सर्टिफाइड योग और  मेडिटेशन एक्सपर्ट है कहते है की ये चीजे हमारी चिंताए दूर नहीं करेंगे पर इनको डील करने की ताकत इन चीजों से हमे आ जाती है। 

   खानपान की आदते 

जैसा अन्न वैसा मन ये कहावत तो सबको पता है  ये नियम सादे है जैसे खाने का समय प्रॉपर हो ,रेगुलर इंटरवल में हो ,भोजन सभी षड रस से युक्त हो जिसे बैलेंस्ड डाइट कहा जाता है वो ले। 
खाने में ज्यादा शक्कर का प्रयोग न हो  रीसर्च से देखा गया है की ज्यादा मीठा खाना ,  कॉफ़ी ,एनर्जी ड्रिंक,अल्कोहल  फ़ास्ट फ़ूड इनका सेवन न करे तो बेहतर है इससे नर्वस सिस्टम को स्टिमुलेशन मिलता है और ज्यादा anxiety  बढ़ती है 
 एंग्जायटी  में ग्रीन टि, लेमोनेड ड्रिंक , बादाम ,अक्रोड आदि को अपनाये। 

    सेल्फ टॉक 

अपने ऊपर अपने विचारो के ऊपर ध्यान दे ,हमारे सोचने का तरीका कैसा है इसके ऊपर ध्यान दे इसके बारे में कुछ प्रॉब्लम हो तो मित्रपरिवार से मदद ले। 
अपने ऊपर अच्छा  कंट्रोल स्थापित करे नेगेटिव विचार आते हो तो उसे पॉजिटिव विचार में बदले।
 CHANSKY  जिन्होंने अपने बुक फ्रीइंग योर सेल्फ फ्रॉम एंग्जायटी में लिखते है ,
 सोचिए ये सब जो हो रहा है ये क्षणिक है और सब बदल रहा है.
 जिन चीजों को आप बदल नहीं सकते  जिनपर हमारा बस न चले उन्हें स्वीकार करे  और परेशान न  हो ,
जैसे नौकरी चली गयी हो तो एक्सेप्ट करे और नयी ढूढ़ने का प्रयास करे न की चिंता करे और मानसिक रोग के शिकार हो जाये। 

   दुसरो की मदद करे 

कुछ करने से हमे आत्मिक ख़ुशी मिलती है मन को आनंद मिलता है और दूसरोकि की परेशानिया दिखती है और हमारा खुद की तरफ देखने का नजरिया बदल जाता है और इससे भी हमारी एंग्जायटी कम हो जाती है ये बात को समझ ले। 


    परिवार से बातचीत 

 इनमे हमारे अपने रिश्तेदार हो मित्र हो कोई भी हो इनसे जरूर बाते  करे अकेले न रहे इन बातो से स्ट्रेस हार्मोन कम हो जाते है.

     खुद को समय दे 

   कुछ अच्छी किताबे पढ़े , कॉमेडी टीवी शोज देखे ,मोटिवेशनल वीडियोस देखे ना कि डर बिठाने वाली चीजों को देखे या पढ़े जिसे हमारे मन की शांति भङ्ग  हो जाये और हम चिंताओं में दुब जाये। 

     म्यूजिक थेरोपी  

म्यूजिक से भी हमारे हैप्पी हार्मोन रिलीज़  होते है इनमे भारतीय शास्त्रीय संगीत  सुने वाद्यों को सुने या बजाये जैसे सतार ,बासरी आदि पंडित हरिप्रसाद  उदाहरण  में कहते ह ,राग भटियार को सुनते रहे ये एक प्रभात राग या मॉर्निंग राग जिसे कहते है  ये  एक अच्छा मूड एलीवेटर है। 

   नींद के बारे में 

रात को जल्दी सो जाये कम से कम ७/८ घंटे की नींद ले सोने से पहले भी अच्छी  चीजो  को पढ़े या देखे। नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार ये दोनों एक दूसरे से कनेक्टेड है इसलिए anxiety  को कंट्रोल करने के लिए साउंड स्लीप  जरूर ले। 

   ट्रेडिशनल  आयुर्वेद मेडिसिन का उपयोग 

 इसमें एक्सपर्ट की सलाह लेकर अश्वगन्धा ,ब्राम्ही शंखपुष्पी, जटामासी ,कुष्मांड  रसायन आदि का प्रयोग जरूर करे इनमे अलग अलग कई तरह के फॉर्म  में उपलब्ध  है जैसे घृत,टेबलेट ,चूर्ण के कॉम्बिनेशन आदि आदी।  

By admin

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